गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और Apple के ऑफर छोड़े, महिला इंजीनियर ने खोली 'कैंडी शॉप'

न्यूयॉर्क की एक महिला ने गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों की नौकरी ठुकराकर कैंडी शॉप खोली है।
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और Apple के ऑफर छोड़े, महिला इंजीनियर ने खोली 'कैंडी शॉप'
Written By:
Vrishti Narad
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हर किसी की चाह होती है कि उन्हें दुनिया की बेस्ट कंपनियों में काम करने का मौका मिले। इनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल सहित और भी कंपनियों के नाम है। लेकिन सुनकर कितना अजीब लगेगा कि एक महिला जो कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल जैसी कंपनियों से ऑफर मिला। लेकिन कैंडी शॉप खोलने के लिए उसने इन ऑफर को ठुकरा दिया हो। महिला इन कंपनियों में इंटर्नशिप भी कर चुकी है। कुछ समय तक वहां काम भी किया था, जिसके लिए उसे अच्छी सैलरी भी मिलती थी।

न्यूयॉर्क में खोली कैंडी शॉप,खाली दुकान देख आइडिया आया

बिजनेस इनसाइडर को दिए इंटरव्यू में महिला ने कहा कि उसकी हमेशा से चाह था कि उसकी एक कैंडी शॉप हो। वो फिलहाल न्यूयॉर्क में रहती है। एक दिन लंच के लिए निकली थी। तभी रास्ते में उसे एक यूनिट (दुकान) दिखी। उसे आइडिया आया कि कैंडी शॉप खोलने के लिए ये बेहतरीन जगह है।

महिला ने कहा कि इसके बाद उसने अपने आइडिया पर काम किया और न्यूयॉर्क में 'लिल स्वीट ट्रीट' के नाम से कैंडी शॉप खोली। वो बताती हैं कि इस फैसले में उनके पति ने भी साथ दिया। कैंडी शॉप खोलने में पूरी मदद की।

गूगल में इंटर्नशिप, ब्लैकस्टोन-माइक्रोसॉफ्ट में काम किया

महिला बताती हैं कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान पहले साल में उन्होंने गूगल में इंटर्नशिप की थी। इसके बाद ब्लैकस्टोन ग्रुप, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज और नामी कंपनियों में अच्छे पदों पर काम किया।

उन्हें इन कंपनियों के अलावा और भी कंपनियों में बड़े पद और मोटी सैलरी ऑफर हुए। उन्होंने कहा- ऐसे ऑफर को कोई भी प्रवासी (Migrant) महत्व देता, लेकिन मैंने अलग इंडस्ट्री में जाने का फैसला लिया। मेरी मां मुझे पैसे बचाने को कहती थी। लेकिन मुझमें हमेशा से ही आंत्रप्रेन्योरशिप की भावना रही। इसी वजह से मैंने हेड ऑफ प्रोडक्ट के तौर पर एक ई-कॉमर्स स्टार्टअप शुरू किया।

बचपन की इच्छा थी, विदेशों से कैंडी-मिठाई लाती थी

महिला ने बताया कि उन्हें बचपन से ही कैंडी को लेकर अलग ही जुनून था। उन्होंने कहा- मैं सोचा करती थी कि बड़ी होकर कैंडी शॉप खोलूंगी। मैं अमेरिका में पली-बढ़ी। स्कूल-कॉलेज में कोरियाई क्लास फेलोज के साथ खाना शेयर करती थी। उनकी मिठाईयां, वहां की कैंडी खाने को मिलती थीं। अलग-अलग जगह की अलग तरह की मिठाईंयां खाईं और देखीं। यहीं से कैंडी-मिठाइयों के लिए मेरा जुनून बढ़ता गया।  मैं जब विदेश की यात्राओं पर जाती थी तो वहां की कैंडी की दुकानों का पता लगाती थी। ढेर सारी कैंडी-मिठाई लेकर आती थी। अपने परिवार के साथ इन्हें शेयर करती थी।

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