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ट्रंप का Deepfake और Revenge Porn पर शिकंजा, हटाना होगा अश्लील कंटेंट

Ragini Sinha

अब अमेरिका में Deepfake और बिना इजाजत अपलोड की गई अश्लील तस्वीरों या वीडियो को लेकर कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इस कानून का उद्देश्य इंटरनेट पर फैले अश्लील और फर्जी कंटेंट पर लगाम लगाना है।

TAKE IT DOWN Act: अमेरिका में Deepfake और बिना इजाजत अपलोड की गई अश्लील तस्वीरों या वीडियो को लेकर कड़ा एक्शन लिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में TAKE IT DOWN Act नामक एक नए कानून पर साइन किया है। इस कानून का उद्देश्य इंटरनेट पर फैले अश्लील और फर्जी कंटेंट पर लगाम लगाना है, चाहे वह असली हो या फिर AI से बना Deepfake वीडियो।

क्या है TAKE IT DOWN कानून?

इस कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति या वेबसाइट किसी की प्राइवेट अश्लील फोटो या Deepfake वीडियो उसकी मर्जी के बिना पोस्ट करती है, तो उससे संबंधित टेक कंपनी को वह कंटेंट 48 घंटे के अंदर हटाना होगा। अगर कंपनियां ऐसा नहीं करतीं, तो उन्हें भारी जुर्माना, कानूनी कार्रवाई या जेल की सजा तक हो सकती है।

ट्रंप ने की घोषणा, फर्स्ट लेडी भी रहीं मौजूद

इस बिल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में एक खास समारोह में साइन किया। इस मौके पर अमेरिका की फर्स्ट लेडी मिलेनिया ट्रंप भी मौजूद थीं। उन्होंने इस कानून को बच्चों, महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया।

Deepfake क्या होता है?

Deepfake एक AI टेक्नोलॉजी है, जिससे किसी का चेहरा या आवाज किसी और के वीडियो या फोटो पर लगाया जा सकता है। इससे नकली वीडियो इतने असली लगते हैं कि कोई भी आसानी से धोखा खा सकता है। यह टेक्नोलॉजी कई बार पोर्नोग्राफिक कंटेंट में इस्तेमाल होती है, जिससे पीड़ित व्यक्ति की इज्जत, प्राइवसी और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है।

दोनों राजनीतिक दलों का समर्थन

अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों ही दलों ने इस कानून का समर्थन किया है। इसे सीनेट के कॉमर्स कमेटी चेयरमैन टेड क्रूज ने तैयार किया और डेमोक्रेटिक सीनेटर एमी क्लोबुचर ने इसे मजबूती से आगे बढ़ाया है।

फिल्मों और समाज में जागरूकता

Deepfake और Revenge Porn के खतरों को लेकर अब समाज और मीडिया भी अलर्ट हो रहे हैं। हाल ही में आई हिंदी फिल्म ‘Loveyapa’ में भी इस टॉपिक को गंभीरता से दिखाया गया है। इसका मकसद यही है कि लोग समझें कि Deepfake सिर्फ एक मजाक नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बर्बाद कर देने वाली चीज है।

टेक्नोलॉजी की आजादी बनाम लोगों की सुरक्षा

यह कानून टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए सख्त मैसेज है कि इंटरनेट की आजादी जरूरी है, लेकिन किसी की इज्जत और प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि Facebook, Instagram, X, Reddit जैसी बड़ी सोशल मीडिया और टेक कंपनियां इस कानून को कितनी गंभीरता से लागू करती हैं, लेकिन इतना तय है कि अमेरिका ने Deepfake और Revenge Porn जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए अब मजबूत कानूनी हथियार तैयार कर लिया है।

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